Friday, 31 July 2015

बचपन की आरजू

उस वक़्त की याद है,जब हमे  ना दुनिया की समझ थी और ना ही दुनियादारी से कोई लेना देना था।कुछ था तो बस यही कि कुछ लोग अपने है और वही हमारी दुनिया है।हर वर्ग के लोग अपने बच्चों को वो सब कुछ देना चाहते है जिसकी वो चाह रखते हो,हर माता-पिता की कोशिश होती है कि वे अपने बच्चों को दुनिया की हर ख़ुशी दे और वो देते भी है।
कुछ वर्ग होते है जो हर ख़ुशी पूरी कर पाते है,कुछ वर्ग ऐसे है जो आधी खुशिया ही दे पाते है और कुछ ऐसे भी वर्ग है जो खुशिया देना तो चाहते है पर मजबूरी ऐसी की,नहीं दे पाते।
देखा गया है की ऎसे बहुत से बच्चे है जिनको 2 वक़्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पाती और कुछ लोग ऐसे है जो हर रोज खाना फेकते है।
उन बच्चों की क्या आरज़ू नहीं की वो भी अच्छे खिलौनो से खेल कर अपना बचपन बिताएं,खिलोने तो छोड़िए जिस हाथ में एक छोटा सा खिलौना के तौर पर चम्मच होना चाहिए उन हाथो में गैचि,फावड़े नज़र आते है।
क्या उन बच्चों की आरज़ू इस मिटटी के गारे में मिल कर ही रह जायेगी।
बचपन को याद करके लोग खुश होते है,लेकिन क्या ये बच्चे भी उस बचपन को याद करना चाहेंगे,कितना दर्द भरा होगा उनके हाथो में,क्या वो दर्द उम्रदराज निकल पायेगा,निकलेगा भी तो सिर्फ अश्रुओं में।
क्या ऐसा बचपन वो याद भी करना चाहेगा,उसकी दिली-ख्वाहिश अधूरेपन से भरी हुई है जिसे वह कभी बया भी नहीं करना चाहेगा।
उस मासूमियत की उम्र में उसे दुनियदारी सिखाई गई जब उसे विद्यालय की और जाना था और जिस उम्र में विश्वविधालय जाना था उस उम्र में वो भी अपने बच्चों की आरज़ू पूरी करने में लग गए।

Thursday, 30 July 2015

दर्द भरी वो रात....

वो रात कोई आम रात नहीं थी,उस रात ने इंसानियत को झकझोर कर दिया था,हा मै निर्भया का दर्द जब भी सोचती हूं मेरे रोमटे खड़े हो जाते है,क्या दर्द भरी वो रात थी जिसने 13दिनों बाद तक जिन्दा तो रखा पर 13 दिनों बादबाद सीधे उस लड़की को मौत के घाट उतार ही दिया।जब भी उस वाखिये को याद किया जाये तो लगता है मनो इंसानियत का अंत और राक्षसो का युग प्रारम्भ हो गया हो।
दरिंदगी की हदे पार की उन लोगो में एक लड़का नाबालिग था जिसे उसकी उम्र की वजह से बख्शा जा रहा था,किन्तु क्या उसे सजा से बर्खाश्त करना वाजिब होगा।यदि वह नाबालिग ही था तो उस दरिंदगी में बराबर की भागेदारी का क्या मकसद था।मकसद तो नहीं पता पर इसे लोग अपनी सोच में मजे मारना जैसे शब्द कहते है,मुझे तो लगता है इन जैसे मुजरिमो को यदि बक्शा गया तो ये देश एक दिन हिंदुस्तान के बदले रेपिस्तान के नाम से जाना जायेगा।