Friday, 27 January 2017

तारीखों पर जागती हमारी देशभक्ति!

जिस गति में हमारा देश तरक्की और उन्नति कर रहा है उससे लाज़मी है कि हम आगे बढ़ रहे है।हमारी सोच आगे बढ रही है,लेकिन क्या सिर्फ हमारी सोच पाश्चात्य सभ्यता को अपनाने तक ही आगे ही बढ़ रही है,या उससे आगे भी हम सोच रहे है।
बात यहाँ सिर्फ सोच या समझ की नहीं है अपितु बात है कि क्या उस बढ़ती हुई सोच ने हमारी देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण को भुला दिया है?आखिर आज के समय में तो जहाँ हम एक ओर बड़ी ही सज्जनता के साथ किसी भी शहीद की शहादत को सलाम करते है,तो वही दूसरी ओर इस सलाम को केवल एक दिन का ड्रामा बना कर छोड़ रहे है।
क्योंकि इसके बाद तो हिमारे दिलो में देशभक्ति का एक अंश भी नजर नही आता।देशभक्ति दिल से की जाती है या फिर 15 अगस्त और 26 जनवरी को अपने गालों पर तिरंगा बना लेने से होती है।आज के समय में तो इस बात का आकलन करना ही मुश्किल है कि कौन देशभक्त है और कौन दिखावे का साथी है!
खैर इन सब बातों पर ध्यान दिया जाए तो यह सब बस लोगो के लिए आज के समय में एक ट्रेंड बन गया है।जिसे चार लोगो के सामने दिखाना के लिए किया जाता है।अगले दिन तो देशभक्त अपने तिरंगे को पहचान भी नही पाते और जो राष्ट्रिय ध्वज को 15 अगस्त,26 जनवरी के दिन हाथों में लिए फिरते है अगले ही दिन उस राष्ट्रिय ध्वज को सड़कों पर या नालो में पड़ा हुआ पाते है।इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देशभक्ति का आज के समय में क्या अर्थ और क्या तात्पर्य है।

Tuesday, 24 January 2017

क्या वाकई गणतंत्र दिवस मायने रखता है युवाओं के लिए

वैसे तो गणतंत्र दिवस हम भारतीयों के लिए कॉफी मायने रखता है,लेकिन क्या हमारी युवा पीढ़ी भी वही सोचती है जो हम सोचते है?गणतंत्र दिवस हम इसलिए मनाते है,क्योंकि इस दिन हमारा संविधान लागू हुआ था।
किसी भी देश का लिखित संविधान होना कॉफी गर्व की बात होती है,लेकिन क्या ऐसा हमारे युवा भी सोचते है?आज का युवा जिन मौज और मस्ती में मग्न दिखाई देता है।उसे देखकर यह बिलकुल नहीं लगता है कि उन्हें गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस के होने से कुछ फर्क भी पड़ता है।वह लोग तो बस अपने मजे करने और कानून को तोड़ने में ज्यादा ध्यान देते है।
आज की युवा पीढ़ी अगर गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस को उत्सव के तौर पर मनाती भी है तो सिर्फ इस वजह से क्योंकि उनके स्कूल या कॉलेज में उस दिन जरूर कोई अटेंडेंस की निश्चितता रहती होगी।अन्यथा आप यही पाएंगे कि उन विद्यार्थियों की संख्या अक्सर गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर कम हो जाती है,जबकि वही विद्यालय या विश्व-विद्यालय में गेदरिंग के समय पूरा मैदान भरा हुआ सा दिखाई देता है।
यह हमारा युवा भारत है जो देशभक्ति गीतों को सुनना पसंद नही करते और वही डीजे वाले बाबु जैसे गानों पर धूम मचाते है।और मचाए भी क्यों ना युवा है गरम खून है।जिनमे हुड़दंग मचाने का साहस है पर संविधान से उन्हें क्या लेना देना।संविधान से उन्हें कहाँ मौज करने मिलती है।
और रही बात युवाओं को उनके अधिकार जानने की तो जिस दिन जरुरत होगी उस दिन खुद ही गूगल करके देख लेंगे,पर अभी तो उनके मौज करने का समय है।ऐसा आज का लगभग 90%युवा सोचता है।