Saturday, 19 December 2015

हारती निर्भया,जीतता अपराध।

निर्भया कांड के आरोपी जिसे की नाबालिग होने के कारण निर्भया की ही बरसी वाले दिन रिहा किया जा रहा है,इससे तो लगता है कि इन जैसे लोगो को और बढ़ावा ही मिलेगा।अगर आरोपी नाबालिग ही था तो शर्मशार करने वाले ऐसे घिनोने अपराध का भागीदार बना ही क्यों?कहा जा रहा कि अपराधी ने अपनी 3 साल की सजा पूरी कर ली है और जज का कहना है कि हमारे पास कोई कानून नहीं है,जज अपनी जगह गलत नहीं,लेकिन हमारा कानून कितने हद तक सही है जो ऐसे अपराधियो को सजा मुकम्बल कराने साहस नहीं दिखा पा रहा।इन भाईसाहब को रिहाई के बाद  कोर्ट द्वारा दिल्ली पुलिस की खास निगरानी दी जा रही है जैसे इन्होंने भारत के लिए कोई सम्मानजनक कार्य कर भारत में पुनः  वापसी ले रहे हो।अगर यही होता रहा तो शायद कभी भी कानून लागू नहीं होने वाला,सरकार को इस विषय में कुछ तो कदम उठाना ही चाहिए वरना वो दिन दूर नहीं जब ऐसे कई  निर्भया कांड के आरोपी नाबालिग ही होंगे जो अपराध करके भी कुछ दिनों में रिहा होकर सड़को पर घूमते नजर आएंगे।

Wednesday, 16 December 2015

बदलते रास्ते

रास्ते बड़े अनजान थे,
हर सड़क सुनसान थे,
फिर भी चल रहा था राहगीर,
क्योंकि मंज़िल पे सवार था।
गुम हुआ कुछ रास्तो पर,
लेकिन हर पल बरकरार था।
तत्परता का मार्ग जो था,
आँखों में वही उजाला था।
पैरो में चुभन थी,
फिर भी एक लगन थी।
मार्ग पे चलता रहा और
जा पंहुचा उस शिखर पे,
जहाँ उसका उजेला था।
रास्ते में काटे तो बहुत थे,
मगर उन काटो में गुलाब की महक थी।
इस महक ने याद दिलाई वो मंज़िल,
जहाँ एक नया सवेरा था।
कुछ शिशो की चुभन भी हुई थी,
लेकिन इस चुभन में भी पारदर्शिता थी,
जो उस मकसद को स्पष्ट करती थी।
हर नकारत्मक्ता को अनदेखा किया,
इसलिए हर दर्द में ख़ुशी का इशारा मिला।
#aim#positivity.