गर्मियों की वजह से पहले ही आग के गोले कम नही बरस रहे थे,ऊपर से आए दिन बड़े-बड़े हादसों का सामना करना पड़ रहा है और इन सब पर एक नजर डाले तो इन हादसों में लोगो की मौत ऐसे हो रही है,जैसे सामूहिक विवाह में कई जोड़े ब्याह रचा रहा हो।इन सब बातों को अगर एक अलग नजरिए से देखे तो प्रशासन इन मामलों के लिए कितना सतर्क है,यह सबसे बड़ा प्रश्न है?
अगर कल हुए घटनाक्रम को देखा जाए तो 13 लोगों की मौत की वजह शायद प्रशासन की लापरवाही भी रही।सहकारी समिति केंद्र जहाँ केरोसिन रखा होता ही है वहाँ सीजफायर तक नहीं था और जहाँ दमकल गाड़ियों को जल्द से जल्द पहुँचने की जरूरत होती है।वहाँ अच्छा-ख़ासा समय लग जाता है।जरूरत है ऐसे में कमियों पर ध्यान देने की,लेकिन इन सब बातों पर ध्यान देना लाज़मी नही समझा जाता है।हम और प्रशासन दोनों ही लापरवाही पर ध्यान देते है,ताकि पहले घटना घटित हो जाए फिर हम उस पर विचार करे और सावधानी बरतें।
ये सावधानियां अक्सर किसी को मौत के घाट उतार कर ही हम अपनाते है।ऐसे में जरूरत है हमे कि हम किसी की मौत का तमाशा देखने से पहले उस चीज़ के लिए सतर्कता बरते।हालांकि हर बार यह भी सही नही है कि गलती प्रशासन की ही हो या किसी व्यक्ति विशेष की ही हो।कभी-कभी हालात भी मजबूर हो जाते है और हम तो फिर उसका शिकार हो ही जाते है।
हाल ही में हुए इंदौर की एक फैक्ट्री में धमाके से वहाँ के मालिक की मौत हो गई।अब ऐसा तो हो नही सकता कि फैक्ट्री मालिक ने सुरक्षा के इंतेज़ामात ना किए हो,लेकिन उस समय हालात ना रहे हो कि वे खुद को बचा पाए।ऐसे में जरूरत है हमे अपनी सुरक्षा को लेकर खुद सतर्क रहने की।
Friday, 21 April 2017
ज़िंदगी मौत ना बन जाए संभालो यारों
Subscribe to:
Posts (Atom)