हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र की मौत के बाद से देश के माहौल में कुछ अलग बदलाव नज़र आ रहे है।एचसीयू के छात्र रोहित वेमुला का आत्महत्या करना शासन के नजरिये से वाजिब ही दिखाई दे रहा है।छात्र रोहित वेमुला ने अपने आखिरी ख़त में ये बात ज़ाहिर की थी कि उसकी मौत का जिम्मेदार उसकी ही यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर अप्पा राव है तथा साथ ही केंद्रीय मंत्री दत्तात्रेय भी है।हैदराबाद के गाचीबावली थाने के इंस्पेक्टर जे.रमेश कुमार के अनुसार छात्रो ने यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर और केंद्रीय मंत्री के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई है।इसके अलावा छात्रो ने विधानपार्षद रामचंद्र राव और दो अन्य छात्रो को भी दोषी बताया है।वे छात्र है सुशील कुमार और रामकृष्ण,इन दोनों पर भी रोहित को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।रोहित के शव को पोस्टमार्टम के लिए लेने जब पुलिस पहुची तो छात्रो ने पुलिस लौट जाओ के नारे लगाकर रोकने की कोशिश की हलाकि कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गई।छात्र ने अपनी अंतिम चिट्ठी में लिखा था कि उसे यूजीसी द्वारा मिलने वाली जूनियर रिसर्च फेलोशिप पिछले छः माह से नहीं मिली थी जिसके चलते उसे कठिनाईयो का सामना करना पड़ रहा था तथा साथ ही उसे और उसके मित्रो को हॉस्टल से निकालने की बात की जा रही थी।छात्र रोहित का शव न्यू रिसर्च स्कॉलर्स हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला।छात्रो ने इस घटना के बाद कड़ा विरोध प्रदर्शन किया।यूँ तो देखा जाये तो दलित छात्रो के सविधान के तहत काफी हद तक आरक्षण किया गया है,बावजूद इसके छात्रो को आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।देश में सबसे ज्यादा आरक्षण आंध्र प्रदेश में ही है फिर भी छात्रो को इतना बड़ा कदम उठाना पड़ रहा है आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है और कहा तक है?? ये बड़ा सवाल हमारे देश की आरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।एक रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश में S.C.,S.T. और O.B.C. के लिए आरक्षण का प्रतिशत क्रमानुसार 15%,16% तथा 25% निर्धारित है।फिर भी ऐसी घटना का सामने आना देश की और शाशन व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।कुल मिलाकार आंध्र प्रदेश में आरक्षण 66.66% है इसके बाद भी छात्रो के साथ अन्याय देश को शर्मशार करने वाली घटना है।
Tuesday, 19 January 2016
मौत के घाट उतरती ज़िन्दगी।
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