जिस गति में हमारा देश तरक्की और उन्नति कर रहा है उससे लाज़मी है कि हम आगे बढ़ रहे है।हमारी सोच आगे बढ रही है,लेकिन क्या सिर्फ हमारी सोच पाश्चात्य सभ्यता को अपनाने तक ही आगे ही बढ़ रही है,या उससे आगे भी हम सोच रहे है।
बात यहाँ सिर्फ सोच या समझ की नहीं है अपितु बात है कि क्या उस बढ़ती हुई सोच ने हमारी देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण को भुला दिया है?आखिर आज के समय में तो जहाँ हम एक ओर बड़ी ही सज्जनता के साथ किसी भी शहीद की शहादत को सलाम करते है,तो वही दूसरी ओर इस सलाम को केवल एक दिन का ड्रामा बना कर छोड़ रहे है।
क्योंकि इसके बाद तो हिमारे दिलो में देशभक्ति का एक अंश भी नजर नही आता।देशभक्ति दिल से की जाती है या फिर 15 अगस्त और 26 जनवरी को अपने गालों पर तिरंगा बना लेने से होती है।आज के समय में तो इस बात का आकलन करना ही मुश्किल है कि कौन देशभक्त है और कौन दिखावे का साथी है!
खैर इन सब बातों पर ध्यान दिया जाए तो यह सब बस लोगो के लिए आज के समय में एक ट्रेंड बन गया है।जिसे चार लोगो के सामने दिखाना के लिए किया जाता है।अगले दिन तो देशभक्त अपने तिरंगे को पहचान भी नही पाते और जो राष्ट्रिय ध्वज को 15 अगस्त,26 जनवरी के दिन हाथों में लिए फिरते है अगले ही दिन उस राष्ट्रिय ध्वज को सड़कों पर या नालो में पड़ा हुआ पाते है।इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देशभक्ति का आज के समय में क्या अर्थ और क्या तात्पर्य है।
Friday, 27 January 2017
तारीखों पर जागती हमारी देशभक्ति!
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