एक दिन से शुरू होता ये सफ़र अंत पर तभी आता है जब आप उस काबिल हो कि दुनिया की समझ हो सके।दुनियादारी की समझ ना हो तो ये जीवन अधूरा होगा ,अधूरा होना तो फिर भी अलग बात होती है लेकिन इसके ना होने पर इंसान आत्महत्या को अपनाता है।दुनियादारी की समझ को सबसे पहले एक माँ ही सिखा सकती है,क्योंकि माँ को सबसे पहला गुरु माना गया है।माँ की ममता में ही बच्चा पहले बोलना,चलना,दुनिया को समझना सीखता है और तभी अपने शिखर को प्राप्त करता है।वाकई माँ की ममता होती ही बड़ी निराली है,कभी जिद करने पे डांटती है,तो कभी उसी जिद को पूरा करने में सफलता दिलाती है।एक माँ का अपने बच्चे से रिश्ता बड़ा ही कोमल होता है जिसको कोई बया नहीं कर सकता।कभी बच्चे को समझती है वो,तो कभी डाट कर सिखलाती है।इस रिश्ते की डोर जैसे रेशम का धागा है,जो पकड़ने पे फिसलता है लेकिन फिसलन भी बड़ी मखमली होती है।खुशनसीब है वो जिनके नसीब में माँ होती है,वरना कुछ लोगो को तो माँ शब्द से ही काम चलाना होता है,क्योंकि उनके पास माँ का साया नहीं होता।कुछ ऐसे लोगो को देखा जाता है कि वो इंसान अच्छा होता है लेकिन बिना माँ के साये के वो कुछ ऐसे राह पर निकल पड़ते है जहा से वापस आना आसान नहीं होता।उस दलदल में उनका पाँव फसता है,जहा से वो निकलना तो चाहते है,पर चाह कर भी निकल नहीं पाते।हो सकता है शायद माँ की आँचल में रहते तो बुरे कामो में ना पड़ते ।इसलिए किसी ने खूब कहा की नसीब तो उनका होता है जिनकी माँ होती है।जीवन तो हर की जीना कैसे भी सिख ही लेता है पर असली और सच्चा जीवन जीना सिखाती है माँ।उसके आशीर्वाद और ममता की बिना एक बच्चे का जीवन अधूरा होता है।अपने लक्ष्य के प्रति सचेत करवाना और उसके शिखर तक पहुचने में माँ का सर्वस योगदान होता है।माँ की कदर करना हर इंसान का फ़र्ज़ है और जो ना करते हो उन्हें,उस इंसान से सीखना चाहिए माँ की कीमत,जिसके पास माँ नहीं है और जो माँ की ममता के लिए हर एक पल तड़प कर जिंदगी बिता रहा है।
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