Sunday, 7 August 2016

काश मै भी एक लड़का होती।

जब भी एक कदम घर से बाहर निकालती हूँ,मुझे ऐसा महसूस होने लगता है जैसे क्या गलती कर दी हमने कि हम लड़की है।चार कदम ज्यों ही आगे बढाती एक नया कमेंट सुनने मिलता।काश ऐसा होता की हम भी लड़को जैसे सड़क से चलते हुए लड़को को कमेंट कर ही देते,तब शायद उन्हें एहसास होता है कि उनके कमैंट्स से हम लड़किया थोड़ा ही पर चिढ ही जाती है।क्यों ना ऐसा किया जाएं कि अब से इन लड़को के सामने उनकी बहन को खड़ा किया जाएं और किसी और लड़के से कमेंट पास करवाया जाएं।फिर देखते है जो सड़क छाप लड़के दूसरों की बहनों को कमेंट करते फिरते है,उनसे अपनी बहन के लिए सुना जाता है या नहीं।अगर सुन सकते हो तो बेशक ही दुसरों की बहनों को कमेंट करो पर यदि खुद की बहन के लिए नही सुन सकते तो दूसरों की बहनो को बोलने से पहले एक बार ही सही सोच कर तो देखो।क्या पता सोच बदल ही जाए और फिर भी फर्क नही पड़ता हो तो फिर तो यही होता कि काश मै भी एक लड़का होता।साथ ही ये भी कि हर लड़की यही सोच लेती है और ऐसा हो जाता है तो सोचो लड़कों तुम्हारे तो अरमान ही टूट जाएंगे।इसलिए लड़कियों की इज्जत करना सीखों और यदि नही हो पाता है तो अपनी बहन के लिए भी दुनिया के हर लड़को से कमेंट सुनते रहो और ख़ुशी से सुनो।

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