Saturday, 17 October 2015

परिस्थिति

एक वक़्त था जब हर कोई मेरा अपना था,हर कोई मुझे पूछता था।समाज में मेरा भी एक बाहुबल था,हर कोई मुझे पूछता था।याद करता था,फिर ना जाने क्यों अचानक ही सबने मुझसे मुँह फेर लिया,ऐसा क्यों हुआ।कही इस सब की वजह मेरी परिस्थिति तो नहीं थी।हाँ कभी मेरा एक रुतबा था,एक अलग ही पहचान थी।कही वो सिर्फ मेरे पैसो या दौलत की वजह से तो नहीं थी।
     मुझमे ऐसा तो कोई परिवर्तन नहीं आया जिसके वजह से सब मुझसे मुँह फेर रहे??लेकिन इसका कारण आखिर है क्या?मेरा रवैया सभी के लिए पहले की तरह ही फिर भी ऐसा क्यों??? अब धीरे-धीरे समझ रहा हूँ कि ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा है।अगर उस रात दुर्घटना में मेरा पैर अलग ना हुआ होता और मै पहले के तरह ही पैसा कमाता तो शायद लोग वैसे ही व्यवहार करते जैसा पहले था।
                                 लेकिन क्या किसी भी व्यक्ति की अहमियत उसके पैसो से होती है,अगर ऐसा होता है तो झूठे और मक्कार अमिर लोग बड़े सज्जन होते है और शरीफ एवम् ईंमानदार गरीब बहुत ख़राब होते होंगे।शायद आज के समय में यही दस्तूर होगा।वैसे कमाल के है इस दुनिया के कायदे जो लाचार उसका लोग मजाक बनाते है और जो लोग उच्च श्रेणी में आते है उनको लोग पूछते है।दस्तूर भी बड़ा अजीब है इस ज़िन्दगी का जहाँ एक पल कोई सम्भालता है तो उसी पल कोई बिखरता है।
                        खैर इसी का नाम जीवन है,लेकिन इस संघर्ष के वक़्त कौन साथ निभाता है ये देखने वाली बात होती है।हर वक़्त को अच्छा ही समझना चाहिए,क्योंकि जो अच्छा वक़्त होता है उसके साथी सभी होते है।लेकिन जो बुरा वक़्त होता है उसमे आपका साथी कौन है और कौन नहीं,ये अवश्य ही ज्ञात हो जाता है,इसलिए कभी कोई वक़्त बुरा नहीं होता।
                     बस कुछ वक़्त ख़ुशी देते है तो कुछ ज्ञान।परिस्थिति चाहे जैसी भी हो,लेकिन जो उसे खुश रहते हुए पार कर जाये।उसके जीवन में कभी बुरा वक़्त नहीं आ सकता और ना ही वह कभी दुखी हो सकता है।इसलिए हमेशा हर वक़्त खुश रहो।

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