घूसखोरी केहने को तो आज के समय में बहुत आम बात हो गई है।वैसे देखा जाये तो सही भी है,क्योंकि आजकल तो हर क्षेत्र में बिना घूसखोरी के कोई काम भी तो नहीं होता।घूसखोरी में भारत भी किसी दिन महारत हासिल कर ही लेगा।ना जाने क्यों और कब तक ये सिलसिला जारी रहेगा,जब एक बेरोजगार नौकरी के लिए जाये तो पहले पैसा दे फिर नौकरी पाये,जब एक वृद्ध अपनी पेंशन के लिए दफ्तर में पैसे ना दे पेंशन नहीं मिल पाएगी।ऐसा कई दफे देखा गया है एक वृद्ध अपनी पेंशन के लिए कई बार दफ्तरों में चक्कर लगाते लगाते थक जाते है पर जब तक पैसा ना रख दे काम नहीं होता।आंकड़ो के मुताबिक देखा जाये तो 2013 में भारत 94वीं रैंक थी,175 देशो में से,इसी घूसखोरी में लेकिन वही 2015 में भारत का 175 देशो में से स्थान घूसखोरी में ऊपर आकर 85वाँ हो गया।इस आंकड़े के मुताबिक तो शायद भारत जल्द ही और ऊपर आने की ताक में ही होगा।सभी दफ्तरों में देखा गया कि बेरोजगार घूमने वाले इंसानो में 2005 में 62%व्यक्तियो को रोजगार घुस लेकर प्राप्त हुए है।ये सब आंकड़े तो भारत का स्थान ऊपर ला ही देंगे लेकिन इसके अतिरिक्त राजनीति क्षेत्र की बात की जाए तो 2009 में 524 सदस्य वाली संसद में से 120 सदस्य अपराधी घोषित किये गए थे।वही 2G स्पेक्ट्रम घोटाले में कैबिनेट मंत्री,मुख्यमंत्री इन सबने मिलकर 1.7 लाख करोड़ का घोटाला किया।फिर एक आंकड़ा कामनवेल्थ गेम्स का लिया जाये तो 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 70,000 करोड़ का घोटाला पाया गया।अब देश के बड़े घोटालो में से एक और घोटाले की बात की जाये तो कोयला घोटाला उसमे भी 1.86 लाख करोड़ का घोटाला पाया गया।ये तो सब छोटे मोटे आंकड़े ही हम कह सकते है।अभी इसके अतिरिक्त और भी ऐसे क्षेत्र है जिनके घोटाले भी शामिल किये जाये तो मेरा भारत महान कहना गलत ना होगा।
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